Hanuman Chalisa Aarti GULSHAN KUMAR

Hanuman Bhajan: Hanuman Chalisa Aarti (Jai Hanuman Gyan Gun Sagar, Jai Kapisa Tihun Lok Ujagar) Those who Chant Hanuman Chalisa Aarti Regularly with full devotion will definitely have very good Health & Wealth. Chanting the Hanuman Chalisa Aarti will relieve any kind of illness or adversity and bring Prosperity in one’s life.

Hanuman Chalisa Aarti
Hanuman Chalisa Aarti

 

हनुमान चालीसा * पर आधारित प्रश्नावली १ हनुमान चालीसा किसने लिखी नाम बताना २ हनुमान चालीसा मैं आऐ हनुमान जी कै ३ नाम बताओ ३ हनुमान चालीसा कै पाठ करनै पर किसका नाश?
मान्यता है कि हनुमान चालीसा के रचयिता तुलसीदास हैं. उन्होंने ही रामचरित मानस भी लिखा था. उनके नाम से तो हर कोई परिचित है. उन्होंने किन हालात में इसे लिखा, इसे लेकर कई किंवदंतियां प्रचलित हैं.

हनुमान चालीसा कैसे पढ़ते हैं?

रोजाना सुबह स्नान करके लाल आसन पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। चालीसा पढ़ते समय घी का दीपक जरूर जलाएं। पंक्ति जाप के नियम –किसी भी एक पंक्ति का चुनाव अपनी जरुरत अनुसार करें। नित्य प्रात: तुलसी की माला पर मंत्र की तरह जाप करें।

हनुमान चालीसा के लेखक कौन है?

हनुमान चालीसा में 40 चौपाइयां हैं। जो हनुमानजी की स्तुति में गोस्वामी तुलसीदास जी ने रचित की हैं।

हनुमान चालीसा कब पढ़ना चाहिए?

हनुमान चालीसा का पाठ सुबह नहा-धोकर मंगलवार या शनिवार के दिन किया जाता है। हनुमान चालीसा का पाठ बेहद प्रभावशाली है। इसके पाठ से अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि तो आती ही है साथ ही कई नकारात्मक चीजों का भी प्रभाव कम होता है। हनुमान चालीसा का पाठ करने का सबसे उत्तम समय सुबह और रात के समय है।

हनुमान चालीसा 108 बार पढ़ने से क्या होता है?

यदि समस्या बहुत ही विकट हो जाएं और आप हर तरफ से फंस जाएं तो हनुमानचालीसा का 11 बार पाठ करने की बजाय प्रतिदिन 108 बार पाठ करें। इस प्रयोग में इतनी शक्ति है कि एक बार मरते हुए व्यक्ति को भी जीवन दान दिया जा सकता है। चालीसा के इस पाठ से न केवल बिगड़े हुए काम ही संवरते हैं वरन भूत-प्रेत भी दूर भागते हैं।

दोहा :

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

हनुमानचालीसा चौपाई :

जय ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।
संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।
विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।
भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।
लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।
जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।
जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।
आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।
नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।
चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।
साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।
तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।
अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।
और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।

दोहा :

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

Hanuman Chalisa Aarti in Hindi

Shree Hanuman Ji Ki Aarti lyrics

Aarti Kije Hanuman Lala Ki (x2)

Aarti Kije Hanuman Lala Ki (x2)

Dusht Dalan Ragunath Kala Ki

Aarti Kije Hanuman Lala Ki….(x2)

 

Ja Ke Bal Se Giriver Kaanpe

Rog Dosh Ja Ke Nikat Na Jhaanke

Anjani Putrr Mahabaldayi

Santan Ke Prabhu Sada Suhayi

Aarti Kije Hanuman Lala Ki….(x2)

 

De Beeraa Raghunath Pathaye

Lanka Jaari Siya Sudhi Laiye

Lanka 100 Kott Samundra Se Khayi

Jaat Pavan Sut Baar Na Layi

Lanka Jaari Asur Sanghare

Siya Ramji Ke Kaaj Sanvare

Aarti Kije Hanuman Lala Ki….(x2)

 

Lakshman Moorchit Parhe Sakara

Aan Sajivan Pran Ubhaare

Paith Pataal Tori Yamkare

Ahiravan Ke Bhuja Ukhaare

Baayen Bhuja Asur Dal Mare

Dahini Bhuja Sant Jan Taare

Aarti Kije Hanuman Lala Ki….(x2)

 

Surnar Muni Aarti Utare

Jai Jai Jai Hanuman Uchaare

Kanchan Thaar Kapur Lo thari

Aarti Karat Aajana Mai

Jo Hanuman Ki Aarti Gaave

Basi Baikuntha param Padh Pave

Aarti Kije Hanuman Lala Ki….(x2)

Aarti Kije Hanuman Lala Ki….(x2).

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